7 वर्ष की आयु में वेश्याव्यवसाय, प्रतिदिन 20 ग्राहक – जानिए इस लड़की की दुःख भरी कहानी और उसकी प्रतिकार की लड़ाई

कम्बोडिया में बेटियाँ परिवार में संपत्तियों की तरह होती हैं , उन की जिम्मेदारी होती है परिवार का पालन पोषण करना –  मेरी क्लेरे को यह जान कारी दिया अनुवादक  केंनथें योर्न ने सिर्पोव चैन के पिता ने एक बार उस से कहा था “तुम्हें शिक्षा की आवश्यकता है “

चेन का परिवार कम्बोडिया की राजधानी  कोह थोम में रहता था ,जो कि  एक पिछडा हुआ ग्रामीण  इलाका था | संपत्ति के नाम पर उन के पास  केवल धान का एक खेत था |

आज चान की आयु बीस वर्ष है | वह बताती है की वह एक अच्छे परिवार से सम्बन्ध रखती है| उस का बचपन आनंददाई था, लेकिन पित़ा के देहांत के बाद  उस पर  जैसे वज्रपात हो गया | तब वह 5 वर्ष की थी |

पिता के देहांत के बाद अचानक समय ने करवट बदल लिया , और उसका परिवार अब खाने को तरश गया | पिता के  निधन  के बाद माँ उसके लिए मां नहीं रह गयी |  वह बहुत दुखी रहने लगी , जैसे जीवन की  सारी खुशियाँ चली गयी |

चेन याद करती है –“ हम बहुत गरीब हो गए | उस की माँ ने उसे कहीं और बेच दिया | जब वह सात वर्ष की थी , तब उसे दूसरे के घरों में नौकरानी का काम करना पडा | यद्यपि उस की माँ को यह अनुभव नहीं था की जिसने उस की बेटी को खरीदा है  उस के साथ वह क्या व्यवहार करने वाला है |

लेकिन चेन  को यह अंदाजा हो गया था की उसे अंतहीन यातना पता नहीं कब तक झेलनी पड़ेगी | कम्बोडिया की राजधानी  फेनों पेन्ह  के एक घर से उसे  एक वेश्यालय में ले जाया गया | रात के भोजन के बाद वह सोने के लिए चली गयी |

 

जब वह सुबह में जगी  तो वह उठ नहीं पा रही थी | उसे एक कमरे में ताला बंद कर रखा गया था | वह रो रही थी की कोई दरवाजा खोल दे |

उस वेश्यावृत्ति के अड्डे पर उस मालिक ने उसे पूछा –  क्या तुम्हें ग्राहक चाहिए?  चेन नहीं जानती थी कि उसे इस प्रश्न का उत्तर हां मे देना है , अन्यथा उसे  भयंकर यातना  झेलनी पड़ सकती है |

उस की सजा शुरू होती थी मानव मूत्र पीने से | उसे बाँध दिया जाता था | हजारों चीटियों को उसके शरीर को काटने के लिए छोड़ दिया जाता था |  बिजली के तारों से उसकी पिटाई क्रूरता पूर्वक की जाती थी | अब उसके पास एक ही विकल्प था, अपने  मालिक के प्रश्न के उत्तर में हाँ कहना |

तब उसके पास एक एशिआई ग्राहक आया , जिसकी आँखों से क्रूरता साफ़ दिखती थी | सात वर्षीय बालिका का डरना स्वाभाविक था |परन्तु एक बार भी नहीं कहने पर  उसे और क्रूर यातना भोगना उसका भाग्य था | उस के यौन अंग में गर्म मिर्च डाल दिया जाता था | यातनाएं यहीं नहीं रुकी | गर्म  लोहे के छड उसके यौन अंग में घुसेड दिए जाते थे |

चेन की रखवाली की जाती थी , यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह 20 ग्राहकों को प्रत्येक दिन संतुष्ट करे |  अगर एक भी दिन एक भी ग्राहक कम हुआ तो उसे बिजली के तारों का झटका दिया जाता था | वह याद करती है – कभी – कभी मैं इतना थक जाती थी कि मैं बिस्तर से उठ भी नहीं पाती थी | लोग एक के बाद एक मेरे पास आते जाते थे जैसे सामूहिक बलात्कार | वह चेतना शून्य हो जाती थी | मेरे जीवन में अन्धेरा ही अन्धेरा था |

 

मैंने सोचा मेरा जीवन समाप्त हो गया |

लेकिन इतने दुखों के बावजूद चेन ने साहस नहीं छोड़ा | उस ने सोच लिया था की  उसे इस अँधेरे से निकलना है , चाहे उसके लिए उसे जो भी कीमत चुकानी पड़े |जीवन को दांव पर लगा कर उसने वहां से निकालने का मन बना लिया था | लेकिन भागने के दो प्रयासों में वह पूरी  तरह असफल रही थी | इसका दुष्परिणाम हुआ अमानवीय यातनाएं | उस के घावों पर गर्म मिर्च लगा दिया गया , और पुनः उसे दूसरे वेश्यालय में बेच दिया गया गाया |

वह याद करती है – अगर मैं वहां और अधिक दिनों तक रहती तो निश्चय ही मैं गंभीर रूप से बीमार पड़ जाती, या मेरा मरना निश्चित था |

उसने तीसरी बार भागने की  कोशिश की  और इस बार वह  सफल हो गयी | तब उसकी आयु दश वर्ष की थी |

इस बार  भाग्य ने उस का पूरा साथ दिया  और उसे एक व्यक्ति का साथ मिला, जो उसे पुलिस के पास ले गया | उसे और भी सहयोग मिला जब उसे एक ईमानदार पुलिस वाले से मुलाक़ात हुई , भ्रष्ट पुलिस वाले तो वेश्यालय से भागे लड़कियों को पुनः वहीं पहुंचा देते हैं |

 

पुलिस ने उसे सोमाली मैडम के पास पहुंचा दिया | सोमाली मैडम न्यू भी अतीत में इस पीड़ा का अनुभव किया था जब उन्हें भी जबरन वेश्यावृत्ति को विवश किया गया था | अब सोमाली मैडम एक ऐसा स्कूल चलाती हैं , जहां ऐसी  विवश  लड़कियों का संरक्षण होता है | और जिसे जीवन यापन  के लिए विभिन्न प्रकार के  कार्य करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है | जैस्रे केश विन्याश, सिलाई | उन्हें निकट के स्चूलों में  भी भेजा जाता है |

वहीं  चेन  का बेहतर  जीवन  बीतने लगा | अब वह उस केंद्र में काम करती है, और ऐसी पीड़ित लड़कियों  की मदद  करती हैं | वह यौन  प्रताड़ित  महिलाओं को इस दुनिया से निकल्कने की प्रेरणा देती  हैं |

 

वह साबुन और कंडोम बांटती है ताकि ऐसी  महिलायें गंभीर बीमारियों  से बचे रहें | वह उसका दुःख बांटने में सहयोग करती है |

वह कहती है – मैं अपना बीता  हुआ  कल  नहीं  भूल सकती | उन  क्रूर  मनुष्यों को नहीं भूल सकती | मैं  समझ नहीं सकती कि मुझे यह भीषण दुःख क्यों मिला |

लेकिन मैं इन घटनाओं  का प्रयोग बदलाव  के लिए प्रेरणा के रूप में लेती हूँ | मैं अब संतुष्ट हूँ की  मैं दुखी स्त्रियों  की सेवा कर रही हूँ |

वह अपने संघर्ष भरे दिनों  को याद कर  कहती है- जब  मैं भागी  तो मैं  अपने दुःख  छिपाना चाहती थी | रात को बुरे सपने आते थे | लेकिन अब मैं इस पर खुल कर बात करती  हूँ | मैं दूसरों  की मदद कर  अपना दुःख भूलने का प्रयास करती हूँ | निसंदेह  उसने जो रास्ता चुना वह साहसिक कथाओं में लिखा जाएगा , तथा उसे  प्रशंशित नज़रों से भी देखा जाएगा|

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